Bahu ki vida saransh. बहू की विदा...

Bahu ki vida saransh. बहू की विदा नहीं करनी है क्या? क्या स्त्री शिक्षा दहेज प्रथा को समाप्त करने में सहायक हो सकती है? अपने विचार लिखिए।. अपनी बहू की विदा नहीं करनी है क्या? ‘कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है’ कथन से वक्ता का क्या अभिप्राय है? कभी-कभी चोट भी मरहम का काम कर जाती है, बेटा। अरे, खड़ी-खड़ी हमारा मुँह क्या ताक ‘बहू की विदा’ विनोद रस्तोगी द्वारा रचित एक एकांकी है जो दहेज-प्रथा पर आधारित है। जीवन लाल पचास वर्षीय धनी व्यापारी था। उनकी बहू कमला का भाई . Bahu Ki Vida Summary Animation | Bahu ki Vida ICSE Class 10 Ekanki in Hindi l ICSE class 9 Saransh. बहू की विदा एकांकी का उद्देश्य समाज में प्रचलित दहेज प्रथा के अभिशाप पर तीखा प्रहार करना है जिसमे सबसे अधिक प्रभावित वर्तमान मध्यवर्गीय परिवार है | वर्तमान समाज में बेटी के जन्म से ही उसके DAV Solutions Class – VIII Chapter -14 Bahu Ki Vida बहू की विदा. This one-act play is of Vinod Rastogi. Both should be viewed equally. ‘Bahu Ki Vida’ is a social one-act play. He says that there should be no difference between daughter and daughter-in-law. प्रश्न 1. बहू की विदा एकांकी का सारांश : 'बहू की विदा' विनोद रस्तोगी का लोकप्रिय एकांकी है। इसमें दहेज की समस्या उठाई गई है। जीवनलाल एक धनी व्यापारी है। उनके लड़के रमेश की शादी कमला से हुई है। उत्तर : उपर्युक्त वाक्य 'बहू की विदा' एकांकी से लिया गया है। यह वाक्य जीवनलाल ने प्रमोद से कहा है।. प्रमोद कौन था? वह किसकी विदा करवाने आया था? प्रश्न 2. बहू की विदा Bahu Ki Vida ब हू की विदा नामक एकांकी विनोद रस्तोगी जी द्वारा लिखी गयी है . जीवन लाल कमला की विदा क्यों नहीं करना चाहता था? प्रश्न 3.


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